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मा॒ता च॒ ते पि॒ता च॒ तेऽ ग्रे॑ वृ॒क्षस्य॑ क्रीडतः। विव॑क्षतऽइव ते॒ मुखं॒ ब्रह्म॒न्मा त्वं व॑दो ब॒हु ॥२५ ॥

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

मा॒ता। च॒। ते॒। पि॒ता। च॒। ते॒। अग्रे॑। वृ॒क्षस्य॑। क्री॒ड॒तः॒। विव॑क्षतऽइ॒वेति॑ विव॑क्षतःऽइव। ते॒। मुख॑म्। ब्रह्म॑न्। मा। त्वम्। व॒दः॒। ब॒हु ॥२५ ॥

यजुर्वेद » अध्याय:23» मन्त्र:25


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हिन्दी - स्वामी दयानन्द सरस्वती

फिर माता-पिता कैसे हों, इस विषय को अगले मन्त्र में कहा है।

पदार्थान्वयभाषाः - हे (ब्रह्मन्) चारों वेदों के जाननेवाले सज्जन ! जिन (ते) सूर्य के समान तेजस्वी आपकी (माता) पृथिवी के समान माता (च) और जिन (ते) आपका (पिता) पिता (च) भी (वृक्षस्य) संसाररूप राज्य के बीच (अग्रे) विद्या और राज्य की शोभा में (क्रीडतः) रमते हैं, उन (ते) आपका (विवक्षत इव) बहुत कहा चाहते हुए मनुष्य के मुख के समान (मुखम्) मुख है, उससे (त्वम्) तू (बहु) बहुत (मा) मत (वदः) कहा कर ॥२५ ॥
भावार्थभाषाः - जो माता-पिता, सुशील, धर्मात्मा, लक्ष्मीवान्, कुलीन हों, उन्होंने सिखाया हुआ ही पुत्र प्रमाणयुक्त थोड़ा बोलनेवाला होकर कीर्ति को प्राप्त होता है ॥२५ ॥
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संस्कृत - स्वामी दयानन्द सरस्वती

पुनर्मातापितरौ कीदृशौ भवेतामित्याह ॥

अन्वय:

(माता) पृथिवीवज्जननी (च) (ते) (पिता) सूर्यवद्वर्त्तमानः (च) (ते) (अग्रे) विद्याराजलक्ष्म्यां (वृक्षस्य) राज्यस्य मध्ये (क्रीडतः) (विवक्षत इव) (ते) तव (मुखम्) (ब्रह्मन्) चतुर्वेदवित् (मा) (त्वम्) (वदः) वदेः (बहु) ॥२५ ॥

पदार्थान्वयभाषाः - हे ब्रह्मन् ! यस्य ते माता च यस्य ते पिता च वृक्षस्याग्रे क्रीडतस्तस्य ते विवक्षत इव यन्मुखं तेन त्वं बहु मा वदः ॥२५ ॥
भावार्थभाषाः - यौ मातापितरौ सुशीलौ धर्मात्मानौ कुलीनौ भवेतां ताभ्यां शिक्षित एव पुत्रो मितभाषी भूत्वा कीर्त्तिमाप्नोति ॥२५ ॥
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मराठी - माता सविता जोशी

(यह अनुवाद स्वामी दयानन्द सरस्वती जी के आधार पर किया गया है।)
भावार्थभाषाः - जे माता-पिता सुशील, धर्मात्मा, धनवान व कुलीन असतात त्यांच्या संस्कारानुसार त्यांचा पुत्र मितभाषी बनून किर्ती प्राप्त करतो.